आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
राम जनम-भूमि के, के नैऽ जानय
ओझराइल बाबरी सँ, जेना जे बुझाबय,
मुदाऽ सीता जनम-भूमि, के बुझय,
सीतामही अछि पवित्र धार्मिक स्थल
उद्योग पर्यटणक भरल-पुरल
बहुतो मैथिलक अछि, पीत मरल,
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
हिन्दी छाँटी, आ मैथिली सँ कन्नी काटी,
मैथिली बड़ पिछराह्, चिकनी माँटीं जकाँ
पाऽनि पर, चैन पर, आइन सँ
हिन्दी, अंग्रेज़ी सँ लगाव, मैथिली सँ मुटाव,
लोग कहैत छथि, सुच्चा मैथिल
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
डर लगैऽया,
जाति सँ, पाँति सँ, बाढि सँ
बस-ट्रेन के छ्त सँ,
उद्योग सँ, हरेक बातक सुझाव सँ
वाक-विवाद्क अड्डा चाहक दुकान सँ
मैथिलक जिनगी दाव पर, बैठले-बैठल
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
जाति समीकरण सँ उभरल नेता
दबल-दिमाग, ठेठ-जुबान, सोचविहीन
एक नम्बर के मदारी, डमरु के खिलाड़ी
शोषण के अधिकारी, पैसा के पुजारी
की करताह मैथिल-बिहारी, झेलऽ पड़त
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
झेलऽ पड़त, नेता के नेतागिरी, दादागिरी,
झेलऽ पड़त, “बिहार जाओ बिहारी”
मिथिलामे उद्योग कोसो दुर, मैथिल की करताह,
लाठी खा-खा कऽ, आम्ची, बम्बै-मूम्बई करताह्,
बिहार सरकार मतसून अछि, नेता बिल मे घुसल
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
Saturday, February 16, 2008
Thursday, February 14, 2008
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मन सुतल
राम जनम-भूमि, के नैऽ जानय
ओझराइल बाबरी सँ, जेना जे बुझाबय,
सीता जनम-भूमि, सीतामही के बुझय,
मिथिलाक पवित्र धार्मिक स्थल,
उद्योग पर्यटणक भरल-पुरल, हमर पीत मरल,
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल-----1
हिन्दी छाँटी, आ मैथिली सँ कन्नी काटी,
मैथिली बड़ पिछराह्, चिकनी माँटीं जकाँ
पाऽनि पर, चैन पर, आइन सँ
हिन्दी, अंग्रेज़ी सँ लगाव, मैथिली सँ मुटाव,
लोग कहैत छथि, सुच्चा मैथिल
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल-----2
डर लगैऽया,
जाति सँ, पाँति सँ, बाढि सँ
बस-ट्रेन के छ्त सँ,
उद्योग सँ, हरेक बातक सुझाव सँ
वाक-विवाद्क अड्डा चायक दुकान सँ
मैथिलक जिनगी दाव पर,
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
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