राम जनम-भूमि, के नैऽ जानय
ओझराइल बाबरी सँ, जेना जे बुझाबय,
सीता जनम-भूमि, सीतामही के बुझय,
मिथिलाक पवित्र धार्मिक स्थल,
उद्योग पर्यटणक भरल-पुरल, हमर पीत मरल,
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल-----1
हिन्दी छाँटी, आ मैथिली सँ कन्नी काटी,
मैथिली बड़ पिछराह्, चिकनी माँटीं जकाँ
पाऽनि पर, चैन पर, आइन सँ
हिन्दी, अंग्रेज़ी सँ लगाव, मैथिली सँ मुटाव,
लोग कहैत छथि, सुच्चा मैथिल
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल-----2
डर लगैऽया,
जाति सँ, पाँति सँ, बाढि सँ
बस-ट्रेन के छ्त सँ,
उद्योग सँ, हरेक बातक सुझाव सँ
वाक-विवाद्क अड्डा चायक दुकान सँ
मैथिलक जिनगी दाव पर,
आँखि खुलऽल, कान मूनल, मऽन सुतल
1 comment:
Very revolutionary kavita...
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